श्री रामेश्वर झारखण्ड उ0 मा0 संस्कृत विद्यालय, पूरे चौहान, रेवली, रायबरेली - 229206
1969 में, श्री रामेश्वर झारखण्ड उ0 मा0 संस्कृत विद्यालय, पूरे चौहान, रेवली, रायबरेली शुरू किया गया था। शिक्षा का प्राथमिक माध्यम संस्कृत है और स्कूल अपनी उत्कृष्ट शिक्षण पद्धति पर गर्व करता है।
शिक्षा का उच्च स्तर लोगों की सामाजिक और पारिवारिक सम्मान तथा एक अलग पहचान बनाने में मदद करता है। शिक्षा का समय सभी के लिए सामाजिक और व्यक्तिगत रुप से बहुत महत्वपूर्ण समय होता है, यहीं कारण है कि हमें शिक्षा हमारे जीवन में इतना महत्व रखती है। आज के आधुनिक तकनीकी संसार में शिक्षा काफी अहम है। शिक्षा मनुष्य के भीतर अच्छे विचारों का निर्माण करती है, मनुष्य के जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है। बेहतर समाज के निर्माण में सुशिक्षित नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इंसानों में सोचने की शक्ति होती है इसलिए वो सभी प्राणियों में श्रेष्ठ है लेकिन अशिक्षित मनुष्य की सोच पशु के समान होती है। शिक्षा हम सभी के उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक उपकरण है। शिक्षा का उच्च स्तर लोगों को सामाजिक और पारिवारिक आदर और एक अलग पहचान बनाने में मदद करता है। शिक्षा का समय सभी के लिए सामाजिक और व्यक्तिगत रुप से बहुत महत्वपूर्ण समय होता है। यह एक व्यक्ति को जीवन में एक अलग स्तर और अच्छाई की भावना को विकसित करती है।
जो अत्यंत कम शुल्क में उत्कृष्ट शिक्षकों के माध्यम से बेहतर एवं सम्यक शिक्षा प्रदान कर रहा है।
संस्कृत शिक्षा के उन्नयन के लिए लगभग 50 वर्ष पूर्व सन 1969 में श्री रामेश्वर शिव मंदिर की स्थापना के साथ ही क्षेत्र में संस्कृत पांडित्य कर्मकांड से दैहिक, दैविक, भौतिक, संताप को निक्षेपित करने के उद्देश्य से सर्वधर्म समभाव प्राणी मात्र में प्रेम और कल्याणकारी भावनाओं से ओतप्रोत जीवन कल्याण के लिए संस्कृत विद्यालय की स्थापना हुई। तदुपरांत शिक्षा प्रदान कर रहे विद्वान आचार्यों द्वारा क्षेत्र में समय-समय पर शिक्षा और संस्कार से विद्यार्थियों को लाभान्वित किया। वहीं संस्कृत भाषा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए अन्य आधुनिक विधा का संचार किया जा रहा है । जो छात्र- छात्राओं को शिक्षा में आर्थिक दृष्टि से योगदान देने के लिए मील का पत्थर साबित होंगी।
धन्यवाद
प्रबंधक
भारतीय शिक्षा धर्म ,अर्थ, काम, मोक्ष व सत, रज तम गुणों के साथ मनुष्य के आविर्भाव काल से ही संस्कृत भाषा वांग्मय का महत्वपूर्ण स्थान रहा और देवी देवताओं के मुख की भाषा के रूप में वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, आगम ग्रंथ ज्योतिष एवं दर्शन आदि के अतिरिक्त काव्य, महाकाव्य के अनुशीलन से विदित है। राष्ट्र आज भारतीय संस्कृति को अनुप्राणित करने के लिए धर्म, संस्कृति, राजनीति, दर्शन, वेद, पुराण एवं मानव मूल्यों से संबंधित दुर्लभ ग्रंथों का संग्रह संस्कृत गुरुकुलो को पुनः संचरित कर विश्व में आध्यात्मिक शिक्षा एवं संस्कार ,योग का परचम लहरा रहा है।
धन्यवाद
प्रधानाचार्य